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पराली का प्रबंधन

पराली से निपटने के लिए सरकार ने लिया एक्शन, बांटी जाएंगी 56000 मशीनें

पराली से निपटने के लिए सरकार ने लिया एक्शन, बांटी जाएंगी 56000 मशीनें

उत्तर भारतीय राज्यों में पराली की समस्या (यानी फसल अवशेष or Crop residue) एक बहुत बड़ी समस्या है। अभी खरीफ का सीजन ख़त्म होते ही धान की पराली को किसान आग लगा देते हैं, जिससे प्रदूषण फैलता है और वातावरण का तापमान बढ़ता है जो पर्यावरण के लिए अनुकूल नहीं है। पराली जलाने के कारण कई अन्य समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं, जैसे शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाना। अभी कुछ वर्षों से सर्दियों में दिल्ली के वायु प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी के लिए हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा जलाई गई पराली को जिम्मेदार माना गया है, इसको देखते हुए केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसानों से पराली का प्रबंधन ( फसल अवशेष प्रबन्धन ) करने के लिए कहते हैं। लेकिन जमीन पर इसका कोई खास असर नहीं दिखता, क्योंकि किसानों के पास पराली के प्रबंधन के लिए उचित मशीनें और तकनीक नहीं है, जिससे किसान अपनी पराली को जलाने पर मजबूर हो जाते हैं।

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चूंकि फिर से खरीफ की फसल नजदीक है और पराली का टाइम आने वाला है, जिसने सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है। इसलिए सरकार पराली प्रबंधन के लिए नए प्रयास करने में जुट गई है, इसके तहत पंजाब की सरकार ने फैसला लिया है कि सरकार इस साल किसानों को 56,000 मशीनों का वितरण करेगी, इन मशीनों के द्वारा पराली का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा। पंजाब सरकार में कृषि एवं कल्याण मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा है कि सरकार वो हर संभव प्रयास करेगी जिसके द्वारा किसानों को पराली जलाने से रोका जा सके। पराली से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पंजाब सरकार पहले ही बहुत सारे उपाय कर चुकी है, इसके तहत सरकार ने साल 2018-2022 तक 90,422 मशीनें किसानों को पहले ही वितरित कर चुकी है। पंजाब सरकार ने मशीनों के मामले में एक अलग निर्णय लेते हुए बताया है कि अब छोटे किसानों को अलग तरह की मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी, जिनमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो ड्रिल जैसी मशीनें शामिल होंगी, ऐसी 500 मशीनें राज्य के 154 प्रखंडों में भेजी जाएंगी।

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इसके साथ ही कृषि कल्याण मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि किसानों को अब पराली प्रबंधन के लिए जागरूक किया जाएगा, इस दौरान पंजाब में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा जिसमें पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को बताया जाएगा। जागरूकता अभियान के तहत 15 सितम्बर के बाद कृषि विभाग के निदेशक स्तर के अधिकारी और कर्मचारी किसानों के खेतों में जाकर पराली को न जलाने के प्रति किसानों को जागरूक करेंगे। इसके तहत अधिकारी किसानों के घर में भी जाएंगे और उन्हें इससे होने वाली हानि के बारे में बताएंगे। इस जागरूकता अभियान को पूरे पंजाब में फैलाया जाएगा, जिसमें ग्रामीण विकास और पंचायत के अधिकारी, पर्यावरण विभाग, गैर सरकारी संगठन, स्कूलों और कॉलेजों के छात्र शामिल होंगे, इस दौरान अधिकारी किसानों से आग्रह करेंगे की इन मशीनों को वो खरीद लें।

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केंद्र सरकार ने पराली न जलाने पर किसानों को मुआवजा देने वाली स्कीम को स्वीकृति नहीं दी है, जिसे कृषि कल्याण मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, साथ ही केंद्र सरकार को किसान विरोधी और पंजाब विरोधी बताया है, इस स्कीम के तहत पंजाब सरकार ने राज्य के धान उत्पादकों को पराली न जलाने के एवज में 2500 रूपये प्रति एकड़ का मुआवजा देने के लिए कहा था। जिसमें 1500 केंद्र सरकार का शेयर था जबकि 1000 रूपये पंजाब सरकार और दिल्ली की सरकार द्वारा मिलकर वहन किया जाना था। लेकिन केंद्र सरकार को यह स्कीम लाभप्रद नहीं दिखी और सरकार ने इस पर अपनी सहमति देने से साफ़ मना कर दिया। धालीवाल ने कहा कि पिछली सरकारों के समय कृषि यंत्रों के वितरण में भारी करप्शन हुआ है, जिसकी रिपोर्ट राज्य सरकार की टेबल पर पहुंच चुकी है। करप्शन करने वाले किसी भी आदमी को बख़्शा नहीं जायेगा।
पंजाब में पराली जलाने के मामलों ने तोड़ा विगत दो साल का रिकॉर्ड

पंजाब में पराली जलाने के मामलों ने तोड़ा विगत दो साल का रिकॉर्ड

पंजाब भर में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी होने के साथ, राज्य के ज्यादातर गांवों में धुंध की हालत बनी हुई है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि पंजाब में इस साल घटनाओं की कुल संख्या 1,027 के आंकड़े को छू गई है। भारत के करीब समस्त राज्यों में धान की कटाई आरंभ हो चुकी है। साथ ही, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि, इस वर्ष पराली जलाने के मामलों में काफी वृद्धि देखने को मिली है। नतीजतन, राज्य के ज्यादातर गांवों में धुंध की स्थिति बनी हुई है। ट्रिब्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में खेतों में आग लगने के मामले विगत दो वर्षों की अपेक्षा में काफी ज्यादा हैं। बतादें, कि इससे सरकार द्वारा फसल अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्ञात हो कि सोमवार को पंजाब में पराली जलाने के 58 मामले दाखिल किए गए हैं। इसके साथ ही इस वर्ष घटनाओं की कुल तादात 1,027 के चार अंकों के आंकड़े तक पहुँच चुकी है।

पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी

गौरतलब है, कि पंजाब में आज तक खेतों में आग लगने की अत्यधिक घटनाएं सीमावर्ती क्षेत्रों से दर्ज की जा रही थीं। फिलहाल, मालवा क्षेत्र में किसानों ने धान की पराली जलाना आरंभ कर दिया है। इसका प्रभाव पंजाब एवं दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर भी देखने को मिलेगा। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (पीआरएससी) के आंकड़ों के मुताबिक, 9 अक्टूबर को राज्य में 58 पराली जलाने की घटनाओं को एक सैटेलाइट द्वारा कैद किया गया था। वहीं, 2021 में उसी दिन 114 पराली जलाने की घटनाओं को दर्ज किया गया था। साथ ही, 2022 में ऐसे तीन मामले सामने आए थे।

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पराली जलाने की घटनाओं ने विगत दो वर्षों का तोड़ा रिकॉर्ड

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इसमें चिंता का विषय यह है, कि इस वर्ष की कुल संख्या 1,027 विगत दो वर्षों के संबंधित आंकड़ों से काफी ज्यादा है। 2022 और 2021 के दौरान पंजाब में 9 अक्टूबर तक क्रमशः 714 और 614 घटनाएं दर्ज हुई थीं। दरअसल, आज तक के मामले विगत वर्ष की तुलना में 43.8% ज्यादा और 2021 के आंकड़े (9 अक्टूबर तक) से 67% अधिक हैं। कुल मिलाकर, 2022 में 49,900 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं। 2021 में 71,304; 2020 में 76,590; और 2019 में 52,991 घटनाऐं दर्ज हुई थीं।

पराली जलाने के मामलों में वृद्धि की संभावना - कृषि विभाग

कृषि विभाग के एक अधिकारी का कहना है, कि "संगरूर, पटियाला और लुधियाना में किसानों ने फसल की कटाई शुरू कर दी है और इन तीन जिलों में अगले सप्ताह तक खेत में आग लगने का आंकड़ा काफी बढ़ जाएगा।" जानकारों का कहना है, कि "कुछ खास नहीं किया जा सकता, क्योंकि किसान 2,500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे पर अड़े हुए हैं। परंतु, सरकार इस बात पर बिल्कुल सहमत नहीं हुई है।" साथ ही, अमृतसर प्रशासन ने पराली जलाने पर 279 लोगों पर 6.97 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।